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Showing posts from August, 2020

आजादी

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भारत को आजाद हुए आज 26665 दिन हो गए है । इन 26665 दिनों में भारत और दुनिया में बहुत कुछ बदल गया है। यहाँ westland wapiti से लेकर राफेल तक बहुत कुछ बदला । लेकिन इन बदलाव के बावजूत जो आज भी  नहीं बदला वो है सोच । सोच उन बेटियों के प्रति । जो इन लोगो की नजर में कभी ऊपर उठ ही नहीं पाई। अगर विचार किया जाये की क्या हमारे देश की बेटी आजाद हो पाई है । वो आजद हो पाई उस सोच से जो लोग उसके प्रति रखते है। इन लोगो की नजर से देखा जाये तो कभी-कभी लगता है कि बेटी होना ही पाप है इन लोगो के हिसाब से बेटी कभी ना पढ़े तो अनपढ़ जाहिल। पढ़ लिख ले तो पढाई का घमण्ड। शादी ना करे तो भदजलन नक़्क्चड़ी शादी करले तो अब आया ऊँट  पहाड़ के नीचे  सब से मिलकर रहे तो चालाक हो गई। मिल कर ना रहे तो तो घमंडी हो गई। पढ़ लिख कर यदि शादी करके बच्चे सँभाल ले तो क्या फायदा हुआ पढाई का। कोई नोकरी करले तो देखो पर निकल गए। ये सब हमारे लिए और हमारे समाज के लिए बड़ी शर्म की बात है कि हमने इन बेटियों के लिए कितने मापदंड बना रखे है। कालेजा तो उस वक़्त फट कर बहार आ जाता है जब कई माँ-बाप भी इन सब में शामिल हो जाते है। वो माँ जिस पर ...

शराब कोई आनंद या अभिशाप

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"शराब"ये शब्द भी कितना अजीब है ना, शर+आब ये शर से आब ही छीन लेता है। आखिर इसमें ऐसा होता क्या है जो ये किसी की हस्ती खेलती जिंदगी में आग लगा देती है।ये किसी के सर का ताज छीन लेती है। किसी बेटी की लाज छीन लेती है किसी मां के घर का सुहाग छीन लेती है।आखिर कर क्या देती है ये उस इंसान को जो इसे पी कर अपनी इन्सानियत ही भूल जाता है।वो अपने पराये का फर्क ही भूल जाता है भूल जाता है वो अपनी जान से ज्यादा प्यार करने वाली पत्नी को। भूल जाता है  वो उन बच्चो को जिनको वो अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता है उन पर क्या बित रही होगी। जिन बच्चो की आँख में आसु  तो क्या जब कभी कोई कचरा भी चला जाये तो वो भी रोये बिना नहीं रहता था। कहा चला जाता है वो पिता जो अपने बच्चो की हर ख्वाइस पूरी किये किया करता था। इस शराब ने हमारे समाज को दिया क्या है हर दिन घर में होने वाले झगते जिनका कोई अंत नहीं  और यदि अंत हुआ भी तो कहा किसी कोर्ट में जिसका कभी कोई फैसला आया ही नहीं।   इस शराब ने उनका  सब कुछ छीन लिया। मै आप लोगो से पूछना चाहुगा क्या ये सही है हमारे और हमारे समाज के लिए क्या सरकार इसे कभी ख़त्म ...