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History of war in Afganistan

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  एक पुरानी कहावत है "afghanistan is the graveyard of empires." यानि अफ़ग़ानिस्तान साम्राज्यों का कब्रिस्तान है।  ये कहावत आज भी अफगानिस्तान पर लागू होती है।इसमें हम चाहे महान सिकंदर का उदाहरण ले जिसने अपने शासक बनने के एक साल के भीतर  अंसोलि, मेसोपोटामिया और पर्सिया को कब्ज़ा लिया था।उसके आगे पड़ने वाले अफगानिस्तान को कब्जाने में उसे तीन साल लग गए।लेकिन वहाँ उसका शासन लंबे समय तक नहीं चला और उसके  शासन में भी खून खराबा जारी रहा और फिर धिरे- धीरे उसका शासन खत्म हो गया।ये सिर्फ सिकंदर की बात नहीं है,19वी सदी में दुनिया की महान शक्ति कहे जाने वाले ब्रिटेन का भी यही हाल हुआ।दुनिया पर शासन करने वाले अंग्रेज कभी तसल्ली से शासन नहीं कर पाये। हाल ही के कुछ दशकों की बात करे तो हमारे पास दो उदहारण है। दुनिया की दो महा शक्तियां सोवियत संघ जो अब रूस है और अमेरिका। दोनों अफगानिस्तान में बड़े- बड़े अरमान लिए आये और दोनों को अंत में निराशा ही हाथ लगी। सोवियत संघ का कोटा तो 80 के दसक में ही पूरा हो गया और बचा अमेरिका जिसके साथ 15 अगस्त 2021 को जो हुआ उस से आप और हम अच्छे से वाकिफ है।अम...

मेरे भारत की बेटी

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  आज का हमारा जो शीर्षक है इसकी प्रेरणा मुझे और मेरी टीम को गुंजन सेक्ससेना फिल्म के गाने ' भारत की बेटी ' से मिली है जिसे बोल दिए है अरिजीत सिंह ने और जिसे लिखा है कौसर मुनीर ने तथा जिसे संगीत दिया है अमित त्रिवेदी जी ने। आज के आर्टिकल में हम प्राचीन समय से होते आये अन्यायों से करते है । शुरुआत करते है एक सच्ची घटना से। साल था 1890  फूलमणि नाम की एक 10 साल की लड़की का हरिमोहन नाम 30 साल के एक सक्स ने बलत्कार कर दिया। और फिर जब सामाजिक दबाव आया तो उन सक्स ने उस बच्ची से शादी कर ली। क्योंकि आज के भी किसी  कानून में अपनी पत्नी के साथ कोई जोर जबर दस्ती करने पर किसी प्रकार की कोई सजा नहीं है ।तो उस समय तो कानून ही बहुत कमजोर था तो उसको क्या सजा मिलती। इस मुद्दे को पंडिता रमा बाई , आनन्दी गोपाल जोसी जैसी समाज सेवी महिलाओं ने इस मुद्द्दे को खाफी जोर सोर से उठाया।  इन सब की बदौलत 1891 में एक कानून बना की किसी भी लड़की की सहमति से शारीरिक संबन्ध बनाने की उम्र 12 वर्ष होगी। लेकिन हद तो तब हो गई जब बाल गंगाधर तिलक जैसे महान नेता ने भी इसका विरोद करते हुए कहा कि यह हमारी संस्कृति...

आपका अपना कोन है।

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                                हमें ये प्रश्न काफी बार परेशान करता है कि हमारा अपना कोन है। क्या जिसके साथ हमारा खून का रिश्ता है वो हमारा अपना है या फिर हमारे मित्र हमारे अपने है। या फिर जो हमारे साथ काम करते है वो  हमारे अपने है।या फिर जो हमारे साथ पड़ते है वो हमारे अपने है। जी नहीं असा नहीं है हमारे अपने वो है जो दुःख की घडी में हमारा साथ नहीं छोड़ता है हमारे साथ खड़ा रहता है । कहते है अपनों के साथ समय का पता नहीं चलता। पर अपना कोन है इसका पता भी समय पैर ही पता चलता है आपका अपना वो नहीं जो हमको अच्छा लगता है । या जिसे हम अपना मानते है। हमारा अपना वो है जिसे हम अचे लगते है। जो हमको अपना मानता है । कई लोग मानते है आजकल कोई अपना अपना नहीं है पर ये सच नहीं है। क्योंकि जिसे हम अपना मानके बैठ जाते है। उसका हमारे लिए अपना पन ही नहीं होता। और जो हमको अपना मानता है हम उसकी कद्र ही नहीं करते हमको लगता है ये तो हमारे पास  है ही ये कही नहीं जाने वाला हम उसे पहचान ही नहीं पाते है। हमें ये अहसास ही नहीं होता है...

आजादी

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भारत को आजाद हुए आज 26665 दिन हो गए है । इन 26665 दिनों में भारत और दुनिया में बहुत कुछ बदल गया है। यहाँ westland wapiti से लेकर राफेल तक बहुत कुछ बदला । लेकिन इन बदलाव के बावजूत जो आज भी  नहीं बदला वो है सोच । सोच उन बेटियों के प्रति । जो इन लोगो की नजर में कभी ऊपर उठ ही नहीं पाई। अगर विचार किया जाये की क्या हमारे देश की बेटी आजाद हो पाई है । वो आजद हो पाई उस सोच से जो लोग उसके प्रति रखते है। इन लोगो की नजर से देखा जाये तो कभी-कभी लगता है कि बेटी होना ही पाप है इन लोगो के हिसाब से बेटी कभी ना पढ़े तो अनपढ़ जाहिल। पढ़ लिख ले तो पढाई का घमण्ड। शादी ना करे तो भदजलन नक़्क्चड़ी शादी करले तो अब आया ऊँट  पहाड़ के नीचे  सब से मिलकर रहे तो चालाक हो गई। मिल कर ना रहे तो तो घमंडी हो गई। पढ़ लिख कर यदि शादी करके बच्चे सँभाल ले तो क्या फायदा हुआ पढाई का। कोई नोकरी करले तो देखो पर निकल गए। ये सब हमारे लिए और हमारे समाज के लिए बड़ी शर्म की बात है कि हमने इन बेटियों के लिए कितने मापदंड बना रखे है। कालेजा तो उस वक़्त फट कर बहार आ जाता है जब कई माँ-बाप भी इन सब में शामिल हो जाते है। वो माँ जिस पर ...

शराब कोई आनंद या अभिशाप

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"शराब"ये शब्द भी कितना अजीब है ना, शर+आब ये शर से आब ही छीन लेता है। आखिर इसमें ऐसा होता क्या है जो ये किसी की हस्ती खेलती जिंदगी में आग लगा देती है।ये किसी के सर का ताज छीन लेती है। किसी बेटी की लाज छीन लेती है किसी मां के घर का सुहाग छीन लेती है।आखिर कर क्या देती है ये उस इंसान को जो इसे पी कर अपनी इन्सानियत ही भूल जाता है।वो अपने पराये का फर्क ही भूल जाता है भूल जाता है वो अपनी जान से ज्यादा प्यार करने वाली पत्नी को। भूल जाता है  वो उन बच्चो को जिनको वो अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता है उन पर क्या बित रही होगी। जिन बच्चो की आँख में आसु  तो क्या जब कभी कोई कचरा भी चला जाये तो वो भी रोये बिना नहीं रहता था। कहा चला जाता है वो पिता जो अपने बच्चो की हर ख्वाइस पूरी किये किया करता था। इस शराब ने हमारे समाज को दिया क्या है हर दिन घर में होने वाले झगते जिनका कोई अंत नहीं  और यदि अंत हुआ भी तो कहा किसी कोर्ट में जिसका कभी कोई फैसला आया ही नहीं।   इस शराब ने उनका  सब कुछ छीन लिया। मै आप लोगो से पूछना चाहुगा क्या ये सही है हमारे और हमारे समाज के लिए क्या सरकार इसे कभी ख़त्म ...